श्री गायत्री प्रकटोत्सव 2026: जानिए माता गायत्री से जुड़ी 5 अद्भुत और रोचक बातें

saptranghindustan   |   June 24, 2026   |   1 min read

ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (निर्जला एकादशी) का दिन सनातन परंपरा में बेहद खास है, क्योंकि इसी पावन तिथि को गायत्री जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह उत्सव 24 जून को आ रहा है। इस पावन अवसर पर आइए माता गायत्री के स्वरूप, उनके प्राकट्य और उनसे जुड़े इतिहास को एक नए और रोचक अंदाज में समझते हैं।

 

1. स्वरूप और अलौकिकता (Divine Identity)

वेदों की संरक्षिका: माता गायत्री को ‘वेदमाता’ कहा जाता है। उनके पावन हाथों में चारों वेद सुरक्षित हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि वे समस्त ज्ञान की मूल हैं।
सौम्य वाहन और आयुध: श्वेत (सफेद) हंस माता गायत्री का वाहन है। उनके एक हाथ में ज्ञान के प्रतीक वेद सुशोभित हैं, तो दूसरे हाथ में सृष्टि के जल का प्रतीक कमंडल है।
ब्रह्मांड की आद्यशक्ति: आध्यात्मिक दृष्टि से गायत्री के दो रूप माने जाते हैं। पहला स्थूल रूप, जिसमें वे एक ममतामयी देवी के रूप में पूजी जाती हैं। दूसरा चैतन्य रूप, जिसमें वे इस पूरे ब्रह्मांड की आद्यशक्ति (मूल ऊर्जा) और प्रकृति के पांच प्रमुख स्वरूपों में से एक हैं।

2. प्राकट्य की अद्भुत कथाएँ (Mysterious Origins)

यज्ञ के समय गाय के मुख से प्राकट्य: एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब एक बार यज्ञ का शुभ मुहूर्त निकला जा रहा था और ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री वहां नहीं पहुंच पाईं, तब ऋषियों ने एक गाय को वहां बैठाकर वेद मंत्रों का उच्चारण शुरू किया। उसी समय उस गाय के मुख से दिव्य देवी गायत्री प्रकट हुईं, जिन्हें ब्रह्मा जी के साथ बैठाकर यज्ञ पूरा किया गया।
कमल और वेदों का अंतर्संबंध: पुराणों की एक अन्य गहरी दार्शनिक मान्यता कहती है कि भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न कमल से ब्रह्मा जी प्रकट हुए और ब्रह्मा जी से सावित्री। ब्रह्मा और सावित्री के संयोग से चारों वेदों और समस्त ज्ञान का जन्म हुआ।
Advertisement
Advertisement