Biggest Ekadashi of the Year: निर्जला एकादशी, हिंदू पंचांग की सभी 24 एकादशियों में सबसे ऊपर और सबसे पवित्र मानी जाती है। इसे ‘महाव्रत’ भी कहा जाता है, क्योंकि ज्येष्ठ महीने की भीषण गर्मी में बिना पानी की एक बूंद पिए यह व्रत रखना अपने आप में किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की उपासना करने से वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों के व्रत के समान फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि इसे भीम एकादशी या पांडव एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि जो श्रद्धालु किसी कारणवश पूरे वर्ष एकादशी व्रत नहीं रख पाते, वे केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके सभी एकादशियों का पुण्य अर्जित कर सकते हैं।
- साल 2026 में कब है निर्जला एकादशी?
- सिर्फ एक व्रत और 24 एकादशियों का पुण्य: इसके पीछे का रहस्य क्या है?
- भूलकर भी न करें ये 3 गलतियां
साल 2026 में कब है निर्जला एकादशी?
हिंदू पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, साल 2026 में यह महाव्रत 25 जून 2026, दिन गुरुवार को रखा जाएगा।
मुख्य तिथियां शुभ समय व मुहूर्त
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारंभ- 24 जून 2026, शाम 06:12 मिनट से।
एकादशी तिथि समाप्त- 25 जून 2026, रात 08:09 मिनट पर।
पूजन का शुभ समय- सुबह 10:39 से दोपहर 02:09 मिनट तक।
व्रत पारण का समय- 27 जून 2026, सुबह 05:30 से 08:15 के मध्य।