US Iran Peace Deal Islamabad Memorandum of Understanding: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता आधिकारिक रूप से “इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग” (Islamabad MoU) कहलाता है। यह 14 बिंदुओं वाला एक अंतरिम ढांचा है, जिसका उद्देश्य 110 दिनों से जारी युद्ध को तत्काल रोकना और अगले 60 दिनों के भीतर स्थायी शांति समझौते का मार्ग प्रशस्त करना है।
समझौते के तहत दोनों देशों ने युद्धविराम, समुद्री सुरक्षा, परमाणु निगरानी और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति जताई है। यदि अगले 60 दिनों में वार्ताएं सफल रहती हैं, तो इसे एक व्यापक और बाध्यकारी शांति समझौते में बदला जा सकता है।
पाकिस्तान की कूटनीतिक जीत, लेकिन क्या भारत को चिंता करनी चाहिए?
इस समझौते की एक दिलचस्प बात इसका नाम है। इसे ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि वार्ता प्रक्रिया में पाकिस्तान ने मध्यस्थ और मेजबान की भूमिका निभाई। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार कई महत्वपूर्ण दौर की बातचीत इस्लामाबाद के माध्यम से आगे बढ़ी, जिसने अंततः युद्धविराम का रास्ता तैयार किया।
पहली नजर में यह पाकिस्तान की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता प्रतीत होती है। शहबाज शरीफ सरकार इसे अपनी विदेश नीति की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है। ऐसे समय में जब पाकिस्तान आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है, यह समझौता उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर कुछ सकारात्मक सुर्खियां दिला सकता है।